शिक्षा मंत्री ने यूनेस्को की एचपी फ्यूचर्स परियोजना की स्टियरिंग कमेटी बैठक की अध्यक्षता की
UNESCO's HP Futures Project
कॉम्पिटेंसी-बेसड, खेल आधारित और ग्रीनिंग एजुकेशन से बनेगी हिमाचल की भविष्य उन्मुख शिक्षा प्रणाली
शिमला। UNESCO's HP Futures Project: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां यूनेस्को की एचपी फ्यूचर्स परियोजना (हिमाचल प्रदेश: फाउंडेशन फॉर अपस्किलिंग, टीचर एक्सीलेंस, अंडरस्टैंडिंग, रेडिनेस, इक्विटी एंड सस्टेनेबिलिटी) की दूसरी स्टियरिंग कमेटी बैठक की अध्यक्षता की। समग्र शिक्षा द्वारा आयोजित इस बैठक में परियोजना की अब तक की प्रगति की समीक्षा की गई और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण शिक्षा सुधारों पर विस्तृत चर्चा हुई।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न गतिविधियों की प्रगति साझा करना, फील्ड कंसल्टेशन से प्राप्त अनुभवों पर विचार-विमर्श करना, कार्यान्वयन की समीक्षा करना और आगामी चरण की प्राथमिकताएं तय करना है। उन्होंने कहा कि पहली स्टियरिंग कमेटी बैठक सितंबर 2025 में आयोजित हुई थी, जिसके बाद सिविल सोसाइटी संगठनों, समग्र शिक्षा, एससीईआरटी और डीआईईटी के साथ कॉम्पिटेंसी-बेसड एजुकेशन को लेकर व्यापक परामर्श किए गए। इसके अतिरिक्त स्कूलों का भ्रमण कर शिक्षकों, छात्रों, नीति निर्माताओं और स्कूल प्रबंधन समितियों से संवाद किया गया। हिमकोस्ट जैसी संस्थाओं के माध्यम से ग्रीनिंग एजुकेशन पर भी विशेष फोकस किया गया।
रोहित ठाकुर ने कहा कि एचपी फ्यूचर्स परियोजना वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश सरकार और UNESCO के बीच हुए समझौता ज्ञापन के बाद शुरू की गई थी। यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा-2023 के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और समानता को बढ़ावा देना है, ताकि शिक्षण-शिक्षा प्रक्रिया में सुधार के साथ स्थिरता और विद्यार्थियों में सकारात्मक मूल्यों का विकास सुनिश्चित हो सके।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस परियोजना के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। पहला, कॉम्पिटेंसी-बेसड एजुकेशन, जो छात्रों में सृजनात्मक सोच, समस्या समाधान और व्यावहारिक कौशल विकसित करने पर केंद्रित है। दूसरा, खेल के माध्यम से शिक्षा, जिसमें खेल आधारित गतिविधियों से अनुशासन, टीमवर्क, समावेशिता और नेतृत्व जैसे गुणों को बढ़ावा दिया जाता है। तीसरा, ग्रीनिंग एजुकेशन, जिसके अंतर्गत स्कूल शिक्षा में पर्यावरण जागरूकता, स्थिरता और जलवायु अनुकूलन को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि इन तीनों स्तंभों पर आधारित यह पहल हिमाचल प्रदेश के भौगोलिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य के अनुरूप भविष्य आधारित शिक्षा प्रणाली को मजबूती प्रदान करती है। परियोजना के माध्यम से नीति निर्धारण और कक्षा आधारित शिक्षा के बीच के अंतर की पहचान, शिक्षकों का आत्मविश्वास बढ़ाने, छात्रों की ईको-क्लब गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने तथा समुदाय और स्कूल प्रबंधन समितियों की भूमिका को सशक्त करने में उल्लेखनीय मदद मिली है। अब तक राज्य भर के लगभग 200 शिक्षकों को खेल के माध्यम से मूल्य आधारित शिक्षा में प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि वरिष्ठ माध्यमिक शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। आने वाले वर्षों में अधिक स्कूलों को इस परियोजना से जोड़ा जाएगा और प्रशिक्षण गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा।
रोहित ठाकुर ने यूनेस्को द्वारा प्रदान किए जा रहे सहयोग और तकनीकी विशेषज्ञता की सराहना करते हुए कहा कि एचपी फ्यूचर्स परियोजना का ‘पूरा स्कूल और पूरा समुदाय’ दृष्टिकोण शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि सतत सहयोग, संरचित फॉलो-अप और सुदृढ़ निगरानी प्रणाली के माध्यम से सफल शैक्षणिक प्रथाओं को व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकेगा, जिससे राज्य की शिक्षा प्रणाली और अधिक मजबूत होगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार के निरंतर प्रयासों से शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हाल ही में राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित किया गया है और राष्ट्रीय स्तर के असर, परख और एनएएस जैसे आकलनों में हिमाचल ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। उन्होंने सभी हितधारकों से गुणवत्ता और नवाचार पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया, ताकि हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाए रखे।
बैठक के दौरान एचपी फ्यूचर्स परियोजना के विज़न और प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा राजेश शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत के शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, यूनेस्को प्रतिनिधि तथा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।